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"अजनबी आँखें / अली सरदार जाफ़री" के अवतरणों में अंतर

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सारी शामें उनमें डूबीं
 
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सारी रातें उनमें खोयीं
 
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ग़र्क़ उन आँखों में है
 
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देखती हैं वो मुझे लेकिन बहुत बेगानावार।
 
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14:27, 22 मई 2009 का अवतरण

सारी शामें उनमें डूबीं
सारी रातें उनमें खोयीं
सारे साग़र उनमें टूटे
सारी मय
ग़र्क़ उन आँखों में है
देखती हैं वो मुझे लेकिन बहुत बेगानावार।