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"आता है याद मुझ को गुज़रा हुआ ज़माना / इक़बाल" के अवतरणों में अंतर

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आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
 
आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
वो बाग़ की बहारें वो सब चह-चहाना
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वो बाग़ की बहारें, वो सब का चह-चहाना
  
आज़ादियाँ कहाँ वो अब अपने घोसले की
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आज़ादियाँ कहाँ वो, अब अपने घोसले की
 
अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना
 
अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना
  
 
लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम
 
लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम
शबनम के आँसूओं पर कलियों का मुस्कुराना
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शबनम के आँसुओं पर कलियों का मुस्कुराना
  
 
वो प्यारी-प्यारी सूरत, वो कामिनी-सी मूरत
 
वो प्यारी-प्यारी सूरत, वो कामिनी-सी मूरत
 
आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना  
 
आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना  
 
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10:35, 9 जुलाई 2013 के समय का अवतरण

आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
वो बाग़ की बहारें, वो सब का चह-चहाना

आज़ादियाँ कहाँ वो, अब अपने घोसले की
अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना

लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम
शबनम के आँसुओं पर कलियों का मुस्कुराना

वो प्यारी-प्यारी सूरत, वो कामिनी-सी मूरत
आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना