भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

इस दौर में / परितोष कुमार 'पीयूष'

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 09:27, 24 नवम्बर 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=परितोष कुमार 'पीयूष' |अनुवादक= |संग...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

खोखले होते जा रहे
सभी रिश्तों के बीच
भरी जा रही है
कृत्रिम संवेदनाएँ

वक्त के
इस कठिन दौर में
आसान नहीं है करना
पहचान अपनों की

अपने ही
रच रहें है
अपनों की हत्या
कि तमाम साजिशें

वक्त के
इस कठिन दौर में
मुश्किल है
दो कदम साथ चलना
दो रातें साथ गुजारना
दो बातें प्रेम की करना