भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उंकार देव न लिख्या कागज दई भेज्या / निमाड़ी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:56, 21 जनवरी 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |रचनाकार=अज्ञात }} {{KKLokGeetBhaashaSoochi |भाषा=निमाड़ी }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

उंकार देव न लिख्या कागज दई भेज्या,
तू रे ईरा, बेगा रे घर आव
हम कसां आवां म्हारा उंकार देव,
हमारा माथऽ नारेळ की मान।
नारेल चढ़ावऽ थारो माड़ी जायो,
तू रे ईरा, बेगा रे घर आव।