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"उलटे होर ज़माने आए / बुल्ले शाह" के अवतरणों में अंतर

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एकदम उल्टा ज़माना आ गया है।
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उलटे होर ज़माने आए
कौए गिद्धों को मारने लगे हैं और चिड़िया बाज़ों को खाएँ।
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घोड़ों को चाबुक मारे जा रहे हैं और गधों की गेहूँ की हरी-हरी बालें खिलाई जा रही हैं।
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बुला कहता है हुज़ूर(प्रभु) के आदेश को कौन बदल सकता है।
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एकदम उल्टा ज़माना आ गया है।
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उलटे होर ज़माने आए।
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काँ गालड़ नूँ मारन लग्गे,
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चिड़िआँ जुरे<ref>शिकरा</ref> खाए।
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उलटे होर ज़माने आए।
  
'''मूल पंजाबी पाठ'''
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इराकिआँ<ref>अरब इराक का तेज़ घोड़ा</ref> नूँ चाबक पैदे,
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गधो खूत<ref>ज़वी, हरा गेहूँ</ref> खवाए
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उलटे होर ज़माने आए।
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अगले जाए बकाले बैठे,
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पिछरिआँ फरश वछाए।
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उलटे होर ज़माने आए।
  
उलटे होर ज़माने आए,
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बुल्ला हुकम हजूरों आया,
काँ लग्गड़ नु मारन लग्घे चिड़ियाँ जुर्रे खाए।
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तिस नूँ कौण हटाए।
अराकियाँ नु पाई चाबक पौंदी गड्ढे खुद पवाए।।
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बुल्ला हुकम हजूरों आया तिस नू कौन हटाए
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उलटे होर ज़माने आए।
 
उलटे होर ज़माने आए।
 
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10:39, 6 मार्च 2017 के समय का अवतरण

उलटे होर ज़माने आए

उलटे होर ज़माने आए।
काँ गालड़ नूँ मारन लग्गे,
चिड़िआँ जुरे<ref>शिकरा</ref> खाए।
उलटे होर ज़माने आए।

इराकिआँ<ref>अरब इराक का तेज़ घोड़ा</ref> नूँ चाबक पैदे,
गधो खूत<ref>ज़वी, हरा गेहूँ</ref> खवाए
उलटे होर ज़माने आए।

अगले जाए बकाले बैठे,
पिछरिआँ फरश वछाए।
उलटे होर ज़माने आए।

बुल्ला हुकम हजूरों आया,
तिस नूँ कौण हटाए।
उलटे होर ज़माने आए।

शब्दार्थ
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