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"कि कहब हे सखि रातुक / विद्यापति" के अवतरणों में अंतर

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मानक पइल कुबानिक हाथ।।<br>
 
मानक पइल कुबानिक हाथ।।<br>

20:03, 18 अप्रैल 2011 के समय का अवतरण

कि कहब हे सखि रातुक बात।
मानक पइल कुबानिक हाथ।।
काच कंचन नहि जानय मूल।
गुंजा रतन करय समतूल।।
जे किछु कभु नहि कला रस जान।
नीर खीर दुहु करय समान।।
तन्हि सएँ कइसन पिरिति रसाल।
बानर-कंठ कि सोतिय माल।।
भनइ विद्यापति एह रस जान।
बानर-मुह कि सोभय पान।।