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खण्ड-7 / मन्दोदरी / आभा पूर्वे

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ऊ दिन
जबेॅ हम्में हजार तीर सें बिंधलोॅ
तोरोॅ शरीर केॅ देखलेॅ छेलियां
जना साही के शरीर रहेॅ
तेॅ हमरा हठासिये
ख्याल आवी गेलोॅ छेलै
तोरोॅ वहा बलिष्ठ देह
जेकरोॅ गर्दन पर
दस हीरा के माला
हेने शोभै छेलै
जेना तोरोॅ दस शीश रहेॅ;
प्रतिबिम्ब
जना प्रतिबिम्ब नै रहेॅ
विरोधी, मूड़िये समझी केॅ
काटेॅ
दस शीश ।

के बतैलेॅ छेलै
आर्यकुल श्रेष्ठ राम केॅ ई बात ?

आय तोहें हमरोॅ पास नै छोॅ
तेॅ याद आवै छै
ऊ मधुयामिनी के बात
हमरोॅ रूप
हमरोॅ शृंगार
हमरोॅ हास-परिहास
के अनन्य प्रशंसक
तोहें केना
काल के शिकार होय गेलौ ?
धरती पर
के छेलै तोरा नाँखी पराक्रमी
तपी, ऐश्वर्यवान
आर्यपुत्रा सें कैन्हों केॅ कम नै
जो कमी छेलौं
तेॅ यहेॅ किµ
भोगे तोरोॅ लेॅ जीवन छेलौं
सब तोरोॅ लेॅ
तोरा सम्मुख कोय कांही नै,
तही तेॅ तोरा लेॅ
नै कुबेर छेलौं
नै विभीषण।

आबेॅ लोगें जे कहोॅ
कि विभीषण कुलघाती छेलै
आरो कुबेर दंभी
खोजला सें तेॅ सबमें
कुछ-न-कुछ दोख
मिलिये जाय छै।

देवताओ के दुख
अलोपित होय जाय छै
जो ओकरोॅ व्यवहार
स्त्रा के प्रति वाम नै होय छै
हे लंकाधिपति
सब इन्द्रिय सें विरत होलौ पर
तोहें मानोॅ नै मानोॅ
तोरोॅ ई चूक
तोरा लेॅ महाकाल बनी गेलै।

आबेॅ हमरोॅ लेॅ
ई सोना के लंका में
छेवे की करै
हमरा लेॅ,
नै हमरोॅ दियोर
नै ननद
नै भैसुर
न सेविका
नै परिचारिका
कोय कुछ नै।

कोय कुछ हुवौ नै पारेॅ
देश-देश सें
लूटी केॅ लानलोॅ गेलोॅ
ई अपार धन
सोना
चांदी
हीरा-जवाहरात
की लंका के लब्बोॅ अधिपति केॅ
ललचैतै नै
नया लंकेश्वर कोय्यो बनेॅ
विभीषण
आकि कुबेर
फेनू होतै स्त्रा आरो सम्पत लेॅ युद्ध ।

अपार धन आरो वैभव के मोह
भला केकरौ चित्त केॅ
शांत रहै दै वाला छै की ?
वहू में
जे देशोॅ में
किसिम-किसिम के लोग बसेॅ
कोय दैन्य कुल के
कोय असुर कुल के
कोय दानव कुल के
सब-के-सब
बनैलोॅ गेलोॅ बन्दी;
भला की सोचतै
ई देश के हित।

बान्ही-छान्ही केॅ बनैलोॅ
भला के भगत बनलोॅ छै !
एक लंकेश्वर की मरलै
दूसरोॅ
लंकेश्वर होय लेॅ तनलोॅ छै,
आरो फेनू
जे जहाँ बचलोॅ छै
जोॅन-जोॅन सोना के हवेली में
दिवंगत लंकेश्वर के
विधवा रानी सब,
सब बनी जैतै
देखतें-देखतें
नया लंकेश्वर के रानी
युग-युग के कहानी ।

हमरा नै रहना छै
ई वैभव-विलास के
माया नगरी में
जहाँ आदमी के धर्म सें बढ़ी केॅ
आदमी के वैभव छै
आदमी के ताकत छै
जहाँ दास आरो स्त्रा
एक्के रं मानलोॅ जाय,
बात-बात पर
ओकरोॅ ऊपर
मुक्का तानलोॅ जाय;
वहाँ आरो सब के वास हुएॅ पारेॅ
आत्मा केना बसतै ।