भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जो दरे-हुस्न के फ़क़ीर हुए / अर्श मलसियानी

Kavita Kosh से
Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:33, 29 जून 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अर्श मलसियानी }} {{KKCatGhazal}} <poem> जो दरे-हुस्न के फ़क़ीर …)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जो दरे-हुस्न के फ़क़ीर हुए
दौलते-इश्क़ से अमीर हुए

सारे आलम में हो गए मशहूर
जो मुहब्बत के गोशःगीर हुए

आह इन ताइरों की ख़ुश फ़हमी
हो के आज़ाद जो आसीर हुए