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जो होली सो होली / महावीर प्रसाद ‘मधुप’

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1.
तीखी कड़बी बातें
घात और प्रतिघातें
घोर अँधेरी रातें
ज़हर भरी सौगातें
मारो सबको गोली।
जो होली सो होली॥

2.
भेदभाव की खाई
कपट, चाल-चतुराई
बैर, कलह की काई
झगड़ा और लड़ाई
फूँको सबकी होली।
जो होली सो होली॥

3.
शूल नुकीले छाँटो
सुमन स्नेह के बाँटो
पतन-गर्त सब पाटो
जड़ता की जड़ काटो
बोलो मीठी बोली।
जो होली सो होली॥

4.
मन का मैल मिटाओ
सब को गले लगाओ
रूठे मीत मनाओ
गीत मिलन के गाओ
बन कर दामन-चोली।
जो होली सो होली॥

5.
मौसम है अलबेला
प्रेम-प्यार की बेला
हुड़दंगों का मेला
झंझट हो न झमेला
जी भर करो ठिठोली।
जो होली सो होली॥