भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

प्रतिकार / मंगलेश डबराल

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:29, 8 सितम्बर 2007 का अवतरण (New page: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=मंगलेश डबराल }} जो कुछ भी था जहाँ-जहाँ हर तरफ़ शोर की तर...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जो कुछ भी था जहाँ-जहाँ हर तरफ़

शोर की तरह लिखा हुआ

उसे ही लिखता मैं

संगीत की तरह ।


(रचनाकाल : 1999)