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"म्हारी कविता 3 / रामस्वरूप किसान" के अवतरणों में अंतर

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13:10, 17 अक्टूबर 2013 के समय का अवतरण

म्है कवि कोनी बावळी !
कारीगर हूं
थारी-म्हारी प्रीत रौ
मै‘ल चिणूं

इण बीच
काट-छांट में
जकौं ई कीं
झड़ै
उण नै ई
कविता गिणूं।