भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

विचारधारा / मनोज चौहान

Kavita Kosh से
द्विजेन्द्र द्विज (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 17:06, 1 मार्च 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna | रचनाकार= {{KKGlobal}} {{KKRachna | रचनाकार= मनोज चौहान }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

{{KKRachna | रचनाकार=

किसी विचारधारा का पनपना
निर्भर करता है
बहुत हद तक
किसी व्यक्ति विशेष की
परवरिश
और आस – पास के माहौल पर l

प्रतिछवि है यह
समाज में घटित होती
अनंत घटनाओं की l

होता आया है टकराव
विचारधाराओं का
आदिकाल से ही
इनकी बलिवेदी पर बही हैं
रक्त की धाराएं भी
पहुंची है अपूर्णीय क्षति
मानव सभ्यता को l

मैं भी चाहता हूँ देना
एक सकारात्मक दिशा
विचारों के इस प्रवाह को
ताकि जन्म ले सके
एक सार्वभौमिक नव विचारधारा l
 
जिसकी उर्जा का बहाव ले जाए
प्रगति एवं खुशहाली की राह पर
बिना भेद किये
प्रताड़ित, शोषित व कुंठित
और अवसादों से ग्रसित
हर जन को l

इर्ष्या, द्वेष और कपट रहित
ऐसी विचारधारा की
नितांत जरुरत है आज
भटकती मानवता को l