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शोर / सूर्यकुमार पांडेय

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जिधर देखिए, उधर शोर है,
आज इसी का ज़ोर-शोर है।
 
सड़कों पर वाहन का शोर,
मिल में है इंजन का शोर।
भीड़-भाड़ जन-जन का शोर,
शोर मचा है चारों ओर।

नहीं दीखता ओर-छोर है।
जिधर देखिए, उधर शोर है।

बना शोर सबका सरताज,
हुआ हवा पर इसका राज।
ऐसी गिरी शोर की गाज,
इससे बढ़ा प्रदूषण आज।

शहर-नगर हर कहीं ज़ोर है,
जिधर देखिए, उधर शोर है।

चाहें रखें कान पर हाथ,
शोर छोड़ता मगर न साथ।
चाहें दिन हो, चाहें रात,
दिशा-दिशा में इसकी बात।

शोर-शराबा पोर-पोर है,
जिधर देखिए, उधर शोर है।