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"संघर्ष / अंतराल / महेन्द्र भटनागर" के अवतरणों में अंतर

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:होता प्रखर विध्वंसक स्वर,
 
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::नव बल संचित हो प्राणों में
 
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::संघर्ष प्रकृति से नया-नया !
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:मंज़िल है बेहद दूर अभी
 
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:गतिमय संयम बड़ा कड़ा है,
 
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::राह विषम, प्रति निमिष मनुज का
 
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::संघर्ष प्रकृति से नया-नया !
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:चलना ही है जीवन केवल,
 
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:1945
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'''रचनाकाल: 1945
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15:02, 29 दिसम्बर 2009 के समय का अवतरण

छाया सघन अँधेरा पथ पर
लगता एकाकीपन दूभर,
झ×झा के उन्मत्त प्रहारों से
होता प्रखर विध्वंसक स्वर,
नव बल संचित हो प्राणों में
संघर्ष प्रकृति से नया-नया!

मंज़िल है बेहद दूर अभी
और अपरिचित मार्ग पड़ा है,
लक्ष्य ओर प्रेरित चरणों का
गतिमय संयम बड़ा कड़ा है,
राह विषम, प्रति निमिष मनुज का
संघर्ष प्रकृति से नया-नया!

शून्य गगन में प्रलय-बाढ़ से
घिरते जाते बादल के दल,
प्रत्यावर्तन दुर्बलता है
चलना ही है जीवन केवल,
घन गर्जन, चपला नर्तन है
संघर्ष प्रकृति से नया-नया!

रचनाकाल: 1945