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"हालात के लिहाज से ऊँचाइयाँ मिलीं / विकास" के अवतरणों में अंतर

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हालात के लिहाज से ऊँचाईयाँ मिलीं
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हालात के लिहाज से ऊँचाइयाँ मिलीं
 
लेकिन खुली किताब तो रुसवाइयाँ मिलीं
 
लेकिन खुली किताब तो रुसवाइयाँ मिलीं
  

21:21, 20 नवम्बर 2008 के समय का अवतरण

हालात के लिहाज से ऊँचाइयाँ मिलीं
लेकिन खुली किताब तो रुसवाइयाँ मिलीं

ज़िन्दा नहीं रहा कोई लाशों की भीड़ में
सरहद के पास क्या कभी शहनाइयाँ मिलीं

चलती रही हवा कभी बादल को देखकर
गर चल पड़ी तो फिर उसे पुरवाइयाँ मिलीं

रातों को गर चला कभी तन्हा नहीं हुआ
चलता रहा तो मैं मुझे परछाइयाँ मिलीं

कह के गई है फिर नदी कश्ती को छोड़ जा
सागर के जैसी फिर मुझे गहराइयाँ मिलीं