भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

दिल साफ़ नहीं है मैं इबादत न करूँगा / ओम प्रकाश नदीम

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 10:03, 28 नवम्बर 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=ओम प्रकाश नदीम |अनुवादक= |संग्रह= }} ...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दिल साफ़ नहीं है मैं इबादत न करूँगा ।
धोका दूँ ख़ुदा को ये जसारत<ref>दुस्साहस</ref> न करूँगा ।

तूफाँ की क़यादत<ref>नेतृत्व</ref> करूँ कश्ती भी बचाऊँ,
ये मुझसे न होगा मैं सियासत न करूँगा ।

चाहे मेरी आवाज़ का कुछ भी न असर हो,
चुप रह के सितमगर की हिमायत न करूँगा ।

तुम अपनी रिवायात न तब्दील करोगे,
मैं अपने उसूलों से बग़ावत न करूँगा ।

ऐ इत्र के ताजिर ! तेरे बिज़नेस के लिए मैं,
गुलशन के गुलाबों की तिजारत<ref>व्यापार</ref> न करूँगा ।

शब्दार्थ
<references/>