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अलख जगावै आखर / सांवर दइया
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अलख जगावै आखर
साच सुणावै आखर
रूसै कदै मन-मीत
नूंत बुलावै आखर
ऐ मुळकै-बतळावै
पीड़ मिटावै आखर
हेत सूं मन बधावै
आंख दिखावै आखर
इण जग आगै मन री
साख जमावै आखर