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चेतन आदमी / अजय कुमार सोनी

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गरम्यां में चालती
आ ताती लू
म्हानै आज
इत्ती खारी लागी
जाणै काढ ई लेसी
म्हारो राम
कर देसी
म्हानै अचेत।

म्हानै पण आ
अचेत कियां कर सकै
कदै ई सुण्यो है थे
एक सचेत आदमी नै
होंवतो अचेतन
म्है तो सावचेत हूं
बावळी है लूं !