भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जीवन-यात्रा / अज्ञेय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 
अधोलोक में? चलो, वहीं जाना होगा तो वहीं सही।
जितनी तेज़ चलेंगे, यह राह बचेगी उतनी थोड़ी।
जो विलमते, पड़ाव करते पैदल जाएँगे जाएँ-
हम-तुम क्यों न कर लें सवारी के लिए घोड़ी?

अक्टूबर, 1969

ग्रीक विश्वास के अनुसार पाताल-लोक या अधोलोक प्रेत-लोक था; मृत्यु के बाद ‘छायाएँ’ यहीं वास करती थीं।