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ताख में रखा बाबा का लोटा / प्रेमशंकर रघुवंशी

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ताख में रखा है बाबा का लोटा
और लोटे के पीछे बैठी
छिपकली जानती है--
बाबा के पानी पीने का ढंग
और झींगुर, टिड्डे चींटियाँ भी

जब भी ताख में रखे लोटे पर
हथेली लगा ओखभर पानी पीते बाबा
छोटी, बड़ी बूँदें लोटे के भाल पर आ बैठतीं
जिनसे प्यास बुझाते
झींगुर, टिड्डे, चींटियाँ, छिपकली, साथ-साथ

ताख में रखा बाबा का तांबिया लोटा
घर के सामने से निकलते हर प्यासे को
तृप्त कर
दो घड़ी छाँव में बिठा
सुख-दुख के हाल-चाल पूछता
बाँटता दिन रात पानी की दमक सबमें

ताख में रखा बाबा का लोटा
पानीदार खजाना है तृप्ति का !!