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[[Category:गज़ल]]
गुज़रे दिनों की याद बरसती घटा लगे<br>गुज़रूँ जो उस गली से तो ठंडी हवा लगे<br><br>
मेहमान बन के आये किसी रोज़ अगर वो शख़्स<br>उस रोज़ बिन सजाये मेरा घर सजा लगे<br><br>
मैं इस लिये मनाता नहीं वस्ल की ख़ुशी<br>मेरे रक़ीब की न मुझे बददुआ लगे<br><br>
वो क़हत दोस्ती का पड़ा है कि इन दिनों<br>जो मुस्कुरा के बात करे आश्ना लगे<br><br>
तर्क-ए-वफ़ा के बाद ये उस की अदा "क़तील"<br>मुझको सताये कोई तो उस को बुरा लगे<br><br>