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मंगलाचरण / मैथिलीशरण गुप्त

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मेरा रंक शरीर हरे !<br>
कैसे तुष्ट करेगी तुझको,<br>
नहीं राधिका बुधा हरे !<br>
पर कुछ भी हो, नहीं कहेगी <br>
तेरी मुग्धा मुधा हरे !<br>