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Kavita Kosh से
|रचनाकार=गिरिधर
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जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ॥
कह 'गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख समुझि, होइ बीती सो बीती॥
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