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Kavita Kosh से
नई-नई अनाथ । वे दोनों हाथ बाँध कर बैठती हैं,
नए जीवन के बारे में कुछ तय करने के सवाल पर सोचती हुईं ।
फिर वे क़ब्रिस्तान जाती हैं, कुछ तो
पहली बार । उन्हें रोने से डर लगता है,
कुछ शब्द कहना, कभी
खुली हुई क़ब्र में मिट्टी डालना ।
और उसके बाद सभी घर लौटते हैं,
जो अचानक मातमपुर्सी करने वालों से भर गया है ।
विधवा सोफ़े पर बैठ जाती है, एकदम धीर-गम्भीर,
लोग एक-एक कर उससे मिलने के लिए आगे आते हैं,