भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
Changes
Kavita Kosh से
* [[एक होता कि दूसरा होता / रवि सिन्हा]]
* [[ऐ मिरी जान इसी घर को तू जन्नत कह दे / रवि सिन्हा]]
* [[क्या ख़्वाब बेचिए कि वो बाज़ार ना रहे / रवि सिन्हा]]
* [[क्या पूछते हैं दौर क्यूँ अफ़्सुर्दगी का है / रवि सिन्हा]]
* [[कभी न आने की क़समें हज़ार खाओगे / रवि सिन्हा]]
* [[किस बीज से कैसा शजर इस बार हो पैदा / रवि सिन्हा]]