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दृश्ययुग-2 / केदारनाथ सिंह
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20:30, 25 नवम्बर 2009
जो बाद में पता चला एक चेहरा था
जो न जाने कब
देखने
क्र
के
जल में
चुपचाप घुल गया
और बचा रहा देखना
अनिल जनविजय
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