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अगरचे सख़्त सफ़र है, धुआं घना होगा / ध्रुव गुप्त

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अगरचे सख़्त सफ़र है, धुआं घना होगा
कहीं कोई तो मेरी राह देखता होगा

वो जिसने हमको भुलावे सी ज़िंदगी दी है
ज़रूर उसने कोई रास्ता दिया होगा

जो ख़ुद से इश्क़ तेरा है तो कहां जाएगा
तू इधर है तो उधर कौन दूसरा होगा

मैं मर गया तो मेरी बुज़दिली ख़बर होगी
मैं जी गया तो तेरा शुक्रिया अदा होगा

सितारे टांक रहा जो ज़मीं के आंचल में
ख़बर की सारी सुर्ख़ियों से लापता होगा

कभी तमाम भी होता नहीं नदी का सफ़र
वो जा मिले तो समंदर भी रास्ता होगा

बुरी है फिर भी दिलफ़रेब है अपनी दुनिया
तेरी बेरुह सी जन्नत में क्या मज़ा होगा