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अगर क़लम में धार नहीं तो क्या मतलब / डी. एम. मिश्र
Kavita Kosh से
अगर क़लम में धार नहीं तो क्या मतलब
वाणी में ललकार नहीं तो क्या मतलब
निकले हो तुम जंग फ़तह करने को, पर
आँखों में अंगार नहीं तो क्या मतलब
नीति नियम की बातें सिर्फ़ क़िताबी हैं
मन में गर सुविचार नहीं तो क्या मतलब
इक छत के नीचे रहने से क्या हासिल
आपस में सहकार नहीं तो क्या मतलब
कहने भर से कोई अपना हो जाता
अगर दिलों में प्यार नहीं तो क्या मतलब
मोबाइल से प्यार उड़ेला करते हो
होवे जब दीदार नहीं तो क्या मतलब
जनसामान्य समझ फिर कैसे पायेंगे
सहज अगर अश्आर नहीं तो क्या मतलब
मेरे ऊपर फूलों की वर्षा करना
मुझको गर स्वीकार नहीं तो क्या मतलब