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अर्थ-विस्तार / विमलेश त्रिपाठी
Kavita Kosh से
जब हम प्यार कर रहे होते हैं
तो ऐसा नहीं
कि दुनिया बदल जाती है
बस यही
कि हमें जन्म देने वाली माँ के
चेहरे की हँसी बदल जाती है
हमारे जन्म से ही
पिता के मन में दुबका रहा
सपना बदल जाता है
और
घर में सुबह-शाम
गूँजने वाले
मंत्रों के अर्थ बदल जाते हैं