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आरति कीजै श्रीरघुबर की / हनुमानप्रसाद पोद्दार

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आरती भगवान्‌ मर्यादापुरुषोत्तम
आरति कीजै श्रीरघुबर की।
 सत चित आनँद शिव सुन्दर की॥-टेक॥
 दशरथ-तनय कौसिला-नन्दन,
 सुर-मुनि-रक्षक दैत्य-निकन्दन,
 अनुगत-भक्त भक्त-‌उर-चन्दन,
      मर्यादा-पुरुषोत्तम-वर की॥
 निर्गुण-सगुण, अरूञ्प-रूञ्पनिधि,
 सकल लोक-वन्दित विभिन्न विधि,
 हरण शोक-भय, दायक सब सिधि,
      मायारहित दिव्य नर-वर की॥
 जानकिपति सुराधिपति जगपति,
 अखिल लोक पालक त्रिलोक-गति,
 विश्ववन्द्य अनवद्य अमित-मति,
      एकमात्र गति सचराचर की॥
 शरणागत-वत्सल-व्रतधारी,
 भक्त-कल्पतरु-वर असुरारी,
 नाम लेत जग-पावनकारी,
      वानर-सखा-दीन-दुख-हर की॥