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आरति श्रीगैया-मैया की / हनुमानप्रसाद पोद्दार

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(आरती ध्वनि)

   आरति श्रीगैया-मैया की।
    आरति-हरनि विश्व-धैया की॥-टेक॥
 अर्थ-काम-सद्धर्म-प्रदायिनि आरती।
 अविचल अमल मुक्तिपददायिनि
 सुर-मानव सौभाग्यविधायिनि,
    प्यारी पूज्य नन्द-छैयाकी॥-आरती०॥
 अखिल विश्व प्रतिपालिनि माता,
 मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता।
 रोग-शोक-संकट परित्राता,
    भव-सागर हित दृढ़ नैया की॥-आरती०॥
 आयु-‌ओज-‌आरोग्य-विकाशिनि,
 दुःख-दैन्य-दारिद्र्‌य-विनाशिनि।
 सुषमा-सौ?य-समृद्धि-प्रकाशिनि,
    विमल विवेक-बुद्धि-दैया की॥-आरती०॥
 सेवक हो, चाहे दुखदा‌ई,
    सम पय-सुधा पियावति मा‌ई।
 शत्रु-मित्र सबको सुखदा‌ई,
    स्नेह-स्वभाव-विश्व-जैया की॥-आरती०॥