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आली मोरा मोहना आयो रे मोरे आँगना ! / कांतिमोहन 'सोज़'

आली मोरा मोहना आयो रे मोरे आँगना !
आयो मोरे आँगना भायो रे मोरे आँगना !!

कहाँ पे बिठाऊँ मोहे समझ न आए
जो है मन माहीं सो तो कहा नहिं जाए
कहा भी न जाए मोसों रहा भी न जाए
सखी-सहेली आज कोऊ मोरे संग ना !!

आली मोरा मोहना आयो रे मोरे आँगना !
आयो मोरे आँगना भायो रे मोरे आँगना !!

बलि-बलि जाऊँ मैं तो मन में बिठाऊँ
अँखियों में पलकों का पालना बिछाऊँ
वो सब जाने काहे मुख सों बताऊँ
कछु कहे आँसू कछु बोले मोरा कंगना !!

आली मोरा मोहना आयो रे मोरे आँगना !
आयो मोरे आँगना भायो रे मोरे आँगना !!