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आल्हा ऊदल / भाग 13 / भोजपुरी

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कौड़ी लागे फुलवारी के मोर कोड़ी दे चुकाय
तब ललकारे डेबा बोलल मुँगिया लौंड़ी के बलि जाओं
हम तो राजा लोहगाँ के दुनियाँ सिंघ नाम हमार
नेंवता ऐली समदेवा के उन्ह के नेंतवा पुरावन आय
एतनी बोली जब सुन गैले लौंड़ी के भैल अँगार
करे हिनाइ बघ रुदल के
सेरहा चाकर पर मालिक के रुदल रोटी बिरानी खाय
कत बड़ सोखी बघ रुदल के जे सोनवा से करे खाय बियाह
जरल करेजा है बघ रुदल के तरवा से बरे अँगार
लौंड़ी हो के अतर दे अब का सोखी रहा हमार
छड़पल राजा है बघ रुदल लौंड़ी कन पहुँचल जाय
पकड़ल पहुँचा लौंड़ी के धरती में देल गिराय
अँचरा फाड़े जब लौंड़ी के जिन्ह के बंद तोड़े अनमोल
हुरमत लूटे ओहि लौंड़ी के लौंड़ी रामराम चिचियाय
भागल लौंड़ी हैं सोनवा के फुलवारी से गैल पराय
बठली सोनवा सिब मंदिर में जहवाँ लौंड़ी गैल बनाय
बोले सोनवा लौंड़ी से लौंड़ी के बलि जाओं
केह से मिलल अब तूँ रहलू एतना देरी कैलू बनाय
तब ललकारे लौंड़ी बोलल रानी सोनवा के बलि जाओ
देवर आइल तोर बघ रुदल फुलवारी में जुमल बनाय
जिव ना बाँचल लौंड़ी के सोनवा,जान बचावव हमार