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कल को भूलो आज में जीकर दिखाओ / डी. एम. मिश्र
Kavita Kosh से
कल को भूलो आज में जीकर दिखाओ
मुश्किलों का दौर है तो मुस्कराओ
फूल उम्मीदों के फिर खिल जांयेंगे
खाली गमले में कोई पौधा लगाओ
क्या जरूरी हर निशाना ठीक बैठे
तीर तुक्का भी अँधेरे में चलाओ
कारवां में गर नहीं शामिल तो क्या
खु़द की मंज़िल, ख़ुद का रस्ता, खुद बनाओ
तुम यहाँ हो, दिल अभी उस मोड़ पर है
उसको भी समझा बुझा कर ले के आओ
वक़्त अब भी है तुम्हारे पास इतना
आने वाली नस्लों को कुछ दे के जाओ
बेवजह घर में जगह घेरे जो केवल
बस्तियों में वो खिलौने बाँट आओ