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कहाँ कटी थी रात, पूछने आया है / सूफ़ी सुरेन्द्र चतुर्वेदी

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कहाँ कटी थी रात, पूछने आया है ।
किसने छोड़ा साथ, पूछने आया है ।

चौराहों पर चाँदी की तलवारों से,
कहाँ कटाए हाथ, पूछने आया है ।

कहाँ कटा कर हाथ ये झोली फैलाई,
कहाँ मिली ख़ैरात पूछने आया है ।

बदन बेचकर बाज़ारों से जब लौटे,
कहाँ गए जज़्बात पूछने आया है ।

झूठे और मक्कार बादलों से आकर,
कब होगी बरसात, पूछने आया है ।

ना जाने क्या बात जानना चाहे है,
ना जाने क्या बात पूछने आया है ।

जो तूफ़ान हवाओं के कन्धे पर है,
वो मेरी औक़ात पूछने आया है ।