Last modified on 12 मई 2021, at 20:00

कुछ का हिसाब दर्ज है, कुछ बेहिसाब है / फूलचन्द गुप्ता

कुछ का हिसाब दर्ज है, कुछ बेहिसाब है ।
लेकिन तमाम देश का खाना ख़राब है ।

तुमने उपाय जो किया, उम्मीद से परे,
उस पर सवाल क्या करें वो लाज़वाब है ।

जब भूख और प्यास को तरजीह दी नहीं,
कैसे कहें सुकून-ओ-हुस्न-ओ-शबाब है ।

गैरों का ऐब खींच का झण्डा बना दिया
अपने गुनाहो-जुल्म पर डाला हिजाब है ।

ना वेद ना कुरान ना कलाम ए हुक्मराँ
मेरा ग़रीब मुल्क ही सच्ची किताब है ।