चाकर चरस कें त चाहियो अमल नित
चलै नै छै काम, छै चिलम के चपेट में
निपट गंजेरी के त गाँजे में बसल जान
गरज में गाँजा भरी पीऐ सिगरेट में
सुरा के सनक सुविचार के, समाज सुख-
संस्कार सब के ही सरकाबै हेठ में
भनत विजेता जे भुलैलो भंग-भवानी में
भगवान भात त नै भैर देतै पेट में