भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

चौदह मासूमों की स्तुति / रसलीन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आदि नबी अली जान जन्नत खातून आन,
हसन हुसैन जान मारे जे जुलूम के।
जैन आबिदीन पुनि बाकर जाफर सुनि,
काजिम है मन भेदी सकल उलूम के।
अली रजा तकी फुनि, नकी असकरी गुनि,
साहबे जमन हैं हरन पाप भूम के।
योंहीं जिन धूम कीन्हौं पाइहौं न भेद टोम,
धाइ पग चूम आन चौदह मासूम के॥12॥