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वारिध अपार लों मच्यौ है विश्व-व्यापी युद्ध / नाथ कवि

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वारिध अपार लों मच्यौ है विश्व-व्यापी युद्ध,
टैंकन को तोर वायुयान तोप भारी है।
रुण्ड मुण्ड झुण्ड को तमाशो भुकि झांकिवे को,
लीनी रण चंडी देब देबन हंकारी है।
आस तज त्योंही देवताहु गये भारत से,
पहुँचे यूरोप रक्त सरिता निहारी है।
जो पे रंगनाथ रहैं हाजिर यहाँ पै न तो,
चोला के न्हवाये नाथ बरसै कहुँ वारी है॥