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ऐ ख़ुदा दर्द-ए-दिल है बख़्शिश-ए-दोस्त <br>
आब-ओ-दाना नहीं के तुझसे कहें <br><br>
अब तो अपना भी उस गली में ’फ़राज’<br>
आना जाना नहीं के तुझसे कहें<br><br>
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