भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
Changes
Kavita Kosh से
|संग्रह=अशुद्ध सारंग / हेमन्त शेष
}}
{{KKCatKavita}}<poem>
कमरे में आओ तो डर लगता है
कमरा है
कमरे में जाओ तो डर लगता है
कमरा था
डर कमरा नहीं है
और न ही कमरा डर
बस डर है और कमरा है अर्थात
डर डर है, कमरा कमरा है
चाहे आओ या जाओ
</poem>