भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
Changes
Kavita Kosh से
× × × ×
भूला मैं, पहचान न पाया मृत्यु-वेशमें तुमको, नाथ!
लीलामय-लीला विचित्र अति, कोई भी न पा सका पार।
</poem>