|रचनाकार= निदा फ़ाज़ली
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[[Category:गज़ल]]ये ज़िन्दगी {{KKCatGhazal}}<brpoem>ये ज़िन्दगी आज जो तुम्हारे <br>बदन की छोटी-बड़ी नसों में <br>मचल रही है <br>तुम्हारे पैरों से चल रही है <br>तुम्हारी आवाज़ में ग़ले से निकल रही है <br>तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढल रही है
ये ज़िन्दगी
जाने कितनी सदियों से
यूँ ही शक्लें
बदल रही है
बदलती शक्लों बदलते जिस्मों में चलता-फिरता ये ज़िन्दगी <br>इक शरारा जाने कितनी सदियों से <br>जो इस घड़ी यूँ ही शक्लें <br>नाम है तुम्हारा बदल रही इसी से सारी चहल-पहल है इसी से रोशन है हर नज़ारा
सितारे तोड़ो या घर बसाओ
क़लम उठाओ या सर झुकाओ
बदलती शक्लों <br>तुम्हारी आँखों की रोशनी तक बदलते जिस्मों में <br>चलता-फिरता ये इक शरारा <br>जो इस घड़ी <br>नाम है तुम्हारा <br>इसी से सारी चहल-पहल है <br>इसी से रोशन है हर नज़ारा खेल सारा
सितारे तोड़ो या घर बसाओ <br>क़लम उठाओ या सर झुकाओ तुम्हारी आँखों की रोशनी तक <br>है खेल सारा ये खेल होगा नहीं दुबारा <br>
ये खेल होगा नहीं दुबारा
</poem>