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गाँव की चिट्ठी / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
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13:28, 19 दिसम्बर 2017
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बँधा मुकददर गाँव का, पटवारी के हाथ।
दारू -मुर्गे के बिना तनिक न सुनता बात।।11
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वीरबाला
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