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Kavita Kosh से
बोले स्पष्ट कहो मानवता क्यों तुम विकल सकुचायी?
बोली मानवता आकाश-चुम्बी भवनस्वामी- मानवों के,
पीड़ित हूँ मैं निम्न होते- अधोगामी चेतना स्तरांे स्तरों से।
मन-कलुषित, हिय- उद्वेलित, अब हुए तुम्हारे पुत्रों के,
कितना सुना पाऊँगी दुश्चिंतन मैं इन अन्तरिक्ष चरों के?