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प्रिय जब तुम पास थे।
उष्ण तप्त अधर ,स्पर्श को व्याकुल,
किन्तु नैनों में कुछ संकोच-चपल!
हृदय-ध्वनि सकुचाई, किन्तु साहसी-प्रेम के उच्छवास उच्छ्वास थे।
प्रिय जब तुम पास थे।