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उनींदी भोर / कविता भट्ट
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04:52, 5 जुलाई 2018
बाट निहारे
प्रिय साँझ सवेरे
विषाद घेरे
11
मैं वियोगिनी
अनंत अनादि की
योगिनी हुई ।
</poem>
वीरबाला
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