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17:21, 24 मई 2020
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अश्क भरे मेरी दुआएँ तेरे साथ हैं इन आँखों में, कैसे हम मुस्कायें।जाने वाले।हम लोग सताए हैं ग़म के, क्या गीत ख़ुशी के गायें।तू सलामत रहे घर मेरा जलाने वाले।
तेरी अदा, तेरा ये फ़न, ख़ुदारा क्या कहिये हम अहले ग़म की, ज़िंदगी कैसे कटती है,दिन जो गुज़रा रो-रो आँख से छुप के तो रात की ख़ैर मनाएँ।मेरे दिल में समाने वाले।
रात घिर आई, राहें कहती भरी महफ़िल में सभी बैठ के हँस लेते हैं घर अपने वापस चल,हम पर कहाँ मिलते हैं अहले-गर्दे-सफ़र, हम क्या घर लौट के जायें।वीराने सजाने वाले।
मत बहलाओ तू भी तड़पेगा दर्दे दिल मेरा, मुझको नाशाद ही रहने दोसे कभी मेरे लिए,चंद ख़ुशी के लम्हे अपना ग़म दूना कर जायें।हर एक बात पर दिल मेरा दुखाने वाले।
क्यूँ कर गया परेशाँ तलाश करता है "साबिर" ज़िक्र बहारें आने काक्यूँ कू-ब-कू उनको,क्यूँ ख़ुशगवार मौसम में भी दीवाने घबराएँ।लौट के आये हैं वापस कभी जाने वाले?
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