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Kavita Kosh से
ऐ जहां वालो सुनो हम हो गए हैं साठ के
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न खाई न झूठी क़सम खाएंगे खाएँगे हमजुदा हो के तुझसे न रह पाएंगे पाएँगे हम
यक़ीं गर न हो देख ले आज़माकर
बिछड़ने से पहले ही मर जाएंगे जाएँगे हम
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सज गया है फ़लक चाँद की दीद है