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तुम्हें बाँध पाती सपने में! / महादेवी वर्मा
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|संग्रह=नीरजा / महादेवी वर्मा
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तुम्हें बाँध पाती सपने में!<br>
तो चिरजीवन-प्यास बुझा<br>
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